पशु पोषण

आहार संतुलन कार्यक्रम

"पशुधन विकास मिशन द्वारा दुधारू पशुओं के आहार संतुलन पर किसानों को शिक्षित करने हेतु शुरू किया गया एक कार्यक्रम।"

किसान अपने पारंपरिक ज्ञान के आधार पर, जो उन्हें पीढी दर पीढी ज्ञात हुआ है तथा स्थानीय क्षेत्र में उपलब्ध एक या दो खाद्य पदार्थ जैसे कि चोकर, खल, चूनी, अनाज के दाने आदि और मौसम के हिसाब से हरा चारा तथा फसल अवशेष/ भूसा अपने पशुओं को खिलाते रहते हैं। बहुत कम किसान अपने पशुओं को रोजाना खनिज मिश्रण खिलाते हैं, जो खिलाते भी हैं वो 25 से 50 ग्राम ही देते हैं। पशुओं को दिए जाने वाले चारे तथा आहार की मात्रा ज्यादातर उनकी आवश्यकताओं से कम या अधिक होती है तथा उनके आहार में प्रोटीन, ऊर्जा या खनिज का असंतुलन हो जाता है। असंतुलित आहार से पशु दूध कम देता है, उत्पादन लागत अधिक रहती है तथा पशु का स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। इसलिए, किसानों को दुधारू पशुओं के आहार संतुलन पर शिक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।

बायपास प्रोटीन

दुग्ध उत्पादक पशुओं के पेट में चार कंपार्टमेंट होते हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण 'रुमेन' है, जहाँ चारा और भूसे का अधिकांश किण्वीकरण होता है। जब हम इन पशुओं को प्रोटीन की खली / मील देते हैं, तब रुमेन मे जीवाणुओं द्वारा प्रोटीन का अधिकांश भाग (60-70%) अमोनिया मे परिवर्तित हो जाता है। इस अमोनिया का अधिकांश हिस्सा यूरिया के रूप में मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित हो जाता है। इस प्रकार खली का एक महत्वपूर्ण भाग जो पशु आहार का सबसे अधिक महंगा हिस्सा होता है, बर्बाद हो जाता है। यदि हम इन प्रोटीन की खलियों को उपयुक्त रासायनिक उपचार करें तो, रूमेन में इनका किण्वन कम किया जा सकता है।

यह प्रक्रिया/ उपचार, जो रूमेन मे खली के प्रोटीन का किण्वन होने से रक्षा करते हैं, इस तकनीक को बाईपास प्रोटीन तकनीक कहते हैं। संरक्षित खलियों / मील जिसका छोटी आंत में अधिक कुशलता से पाचन हो जाता है और परिणाम स्वरुप दूध उत्पादन के लिए अतिरिक्त प्रोटीन उपलब्ध हो जाती है। यह अच्छी गुणवत्ता के साथ अधिक दूध का उत्पादन करने के लिए पशुओं को मदद करता है।

उपचारित मील को या तो सीधे तौर पर प्रतिदिन एक किलो प्रति पशु के हिसाब से खिलाया जा सकता है, अथवा इसे पशु आहार मे 25 प्रतिशत की सीमा तक शामिल किया जा सकता है और इसे दुग्ध उत्पादन के स्तर के अनुसार प्रति दिन 4-5 किलो की मात्रा तक एक पशु को खिलाया जा सकता है। प्रोटीन खलियों / मील को उपचारित करने की लागत 2.5 से 3.0 ₹ प्रति किलो है, लेकिन दुग्ध उत्पादन में हुई वृद्धि को देखते हुए यह लागत काफी कम है।

यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक (यूएमएमबी)

यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक, यूरिया, मोलासिस, खनिज मिश्रण और अन्य सामग्री के उपयुक्त अनुपात में मिश्रण के द्वारा तैयार किया जाता है। यह दुधारू पशुओं के लिए ऊर्जा, प्रोटीन और खनिज तत्वों को आसानी से उपलब्ध कराने का बेहतर स्रोत है। यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक पशुओं को खिलाने से उनको भरपूर मात्रा में पोषक तत्व तो मिलते ही हैं, साथ में यूरिया के धीमी गति से अंतर्ग्रहण से जैव प्रोटीन का ज्यादा मात्रा में उत्पादन होता है जिससे पाचन क्रिया बेहतर हो जाती है|

रा.डे.वि.बो. ने दुग्ध सहकारी समितियों, निजी संगठनों और अन्य एजेंसियों के लिए 'ठंडी’ प्रक्रिया से यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक (तीन किलो वजन में) बनाने की प्रौद्योगिकी विकसित की है। हरे चारे की कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों में यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक बहुत ही उपयोगी है|

मिश्रित पशु आहार

मिश्रित पशु आहार विभिन्न खाद्य सामग्रियों को उपयुक्त अनुपात में मिलाकर बनाया गया एक मिश्रण है| मिश्रित पशु आहार मुख्यतः अनाज, चोकर, खलियाँ, दाल चुनियाँ, कृषि औधोगिक सह उत्पादों, खनिज पदार्थों और विटामिनों से मिलकर बनता है| यह पशुओं को जरुरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने का सस्ता स्रोत है, यह चूरी, गोलियाँ, मुरमुरा या घनाकार आदि के रूप में होता है|

मिश्रित पशु आहार बढ़ते बछड़ों/ बछियों के लिए, वयस्क पशुओं के लिए, सूखे, दुधारू एवं गाभिन पशुओं के लिए संतुलित तथा स्वादिष्ट पोषक आहार का काम करता है| इसे निर्धारित मात्रा में नियमित प्रयोग करने से दुग्ध उत्पादन की लागत को कम किया जा सकता है एवं किसानों की शुद्ध आय को बढ़ाया जा सकता है|

इस समय, भारत में दुधारू पशुओं के लिए केवल दो प्रकार (टाइप । और टाइप ।।) के मिश्रित पशु आहार बनाये जा रहे हैं| दूध उत्पादन में वृध्दि, विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता एवं किसानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए इस समय कई प्रकार के मिश्रित पशु आहार बनाने की आवश्यकता है|

बछड़ा/बछिया का पोषण

किसी भी डेरी फार्म की सफलता उसके बछड़ों/ बछियों के उचित प्रबंधन पर निर्भर करती है| बछड़ों/ बछियों के प्रारंभिक जीवन में बेहतर पोषण उनके तेजी से विकास और जल्दी परिपक्वता के लिए अच्छा होता है| अपने यौवन के समय परिपक्व शरीर के वजन का 70-75 प्रतिशत पाने के लिए उन्हें सावधानी से पाला जाना चाहिए। छोटे बछड़ों/ बछियों के अनुप्युक्त पोषण के कारण पहले ब्यांत में अधिक उम्र और पूरे जीवन काल की उत्पादकता में कमी हो जाती है|

बछड़ों/ बछियों के खान पान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:

  • • बछड़े/ बछियों के जन्म के आधे घंटे के अंदर कोलोस्ट्रम (खीस) खिला देना चाहिये
  • • बछड़ो/ बछियों को दूध/ दुग्ध प्रतिस्थापक (milk replacer) पिलाना
  • • जन्म के दूसरे हफ्ते से ही अच्छी गुणवत्ता वाला बछड़ों/बछियों का दाना देना चाहिए
  • • बछड़ो/ बछियों को अच्छी गुणवत्ता वाली सूखी घास (हे) भी देनी चाहिए
  • • कृमिनाशक एवं टीकाकरण समय पर करवाना चाहिए

बायपास वसा

आमतौर पर, ताजे ब्यांत और अधिक दूध देने वाले पशुओं के आहार में उर्जा की कमी पाई जाती है। पशु के कम खाने एवं दूध उत्पादन बढने से इस उर्जा का अभाव और अधिक बढ़ जाता है। ऐसा देखा गया है, कि ब्यांत के बाद पशुओं में 80 से 100 किलो के आसपास शरीर का वजन कम होना आम बात है। ऐसे कमजोर पशु तब तक गर्मी में नहीं आ पाते हैं जब तक की वो अपना ब्यांत के बाद कम हुआ शारीरिक वजन पूरा या आंशिक रूप से वापस नहीं पा लेते ।

इस वजह से पशुओं में गाभिन होने में देरी होती है और दो ब्यांतों के बीच का अन्तराल लंबा हो जाता है। इसके अतिरिक्त, पशु इस अवधि के दौरान दूध भी कम देते हैं, तथा पूरे ब्यांतकाल का दुग्ध उत्पादन भी कम हो जाता है। ज्यादा दुग्ध उत्पादन होने पर, किसान अपने पशुओं को आमतौर पर तेल या घी पिलाते हैं। परंतु यह किफायती नहीं है, और रूमेन में रेशे की पाचाकता भी कम हो जाती है।

खनिज मिश्रण

डेरी पशुओं के चारे और आहार में दुग्ध उत्पादन और प्रजनन के लिए जरुरी सभी खनिज शामिल नहीं होते। चारे और आहार में खनिजों का स्तर क्षेत्र से क्षेत्र में बदलता रहता है। अतः विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों के लिए खनिज मानचित्रण कार्यक्रम पर आधारित क्षेत्र विशिष्ट खनिज मिश्रण तैयार करना जरूरी है।

राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने विभिन्न राज्यों के लिए खनिज मानचित्रण पूर्ण कर लिया है तथा डेरी पशुओं के आहार के पूरक हेतु क्षेत्र विशिष्ट खनिज मिश्रण फोर्मुलेशन विकसित किए हैं। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने खनिज मिश्रण की उत्पादन प्रक्रिया और संयंत्र डिजाइन को मानकीकृत किया है । राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड की मदद से विभिन्न राज्यों में विभिन्न एजेंसियों ने बढ़ते हुए तथा स्तनपान कराने वाले पशुओं के लिए क्षेत्र विशिष्ट खनिज मिश्रण का उत्पादन और बिक्री शुरू की है। डेरी सहकारी समितियों एवं अन्य एजेंसियों को 12 और 25 मीट्रिक टन/प्रतिदिन क्षमता वाले खनिज मिश्रण संयंत्र स्थापित करने के लिए तकनीकी सहायक प्रदान की जा रही है।



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